चुनौती

अधिकांश भारतीयों को स्वच्छता का सुरक्षा चक्र उपलब्ध नहीं है। 600 मिलियन से ज्यादा भारतीय रोजाना खुले में शौच करते हैं । देश को ना सिर्फ ज्यादा शौचालयों की जरूरत है, बल्कि मानव मल के सुरक्षित नियंत्रण, परिवहन, शोधन और निष्पादन की भी जरूरत है। अधिकांश मानव मल बिना शोधन के ही पर्यावरण चर्क में फिर से शामिल कर दिया जाता है। भारत में जल प्रदूषण का यह सबसे बड़ा कारण है और स्वास्थ्य पर इसका बहुत बुरा असर होता है। संक्रमित पानी डायरिया का बड़ा कारण है, जो हर साल हजारों बच्चों की मौत का कारण बनता है और उससे कई गुना को जीवन भर के लिए स्टंटेड छोड़ देता है।


अवसर

भारत में स्वच्छता के बेहतर साधनों पर निवेश से महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक लाभ हासिल हो सकते हैं। इससे संक्रामक रोगों के मामले घटाए जा सकते हैं और अपंगता व जल्दी होने वाली मृत्यु के मामलों में कमी लाई जा सकती है। बेहतर साफ-सफाई से स्वास्थ्य सुविधा पर होने वाला खर्च घटाया जा सकता है, उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है और साथ ही बेहतर शैक्षणिक नतीजे भी हासिल किए जा सकते हैं।

जितने व्यापक स्तर पर यह समस्या है, इसके समाधान के लिए विकेंद्रित तरीके ही कारगर हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर मल का शोधन करने करने वाले आधुनिक शौचालय उपलब्ध करवाना और समुदाय के स्तर पर ही सीवेज ट्रीटमेंट के आधुनिकतम प्लांट उपलब्ध करवाना।


हमारी रणनीति

हमारा लक्ष्य भारत के शहरों की स्वच्छता सुनिश्चित करने में मदद करना है जहां हर व्यक्ति को स्वच्छ शौचालय उपलब्ध हो और साथ ही मानव मल के सुरक्षित नियंत्रण, शोधन और निष्पादन के स्थानीय समाधान मिल सकें। हम भारत की केंद्र सरकार और कुछ चुनिंदा राज्यों और शहरों के साथ काम करते हैं ताकि उपयुक्त शहर स्वच्छता योजना तैयार की जा सके, निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी के जरिए स्वच्छता संबंधित सेवाएं मुहैया करवाई जा सकें, नई तकनीक और डिजाइन समाधानों की क्षमता प्रदर्शित की जा सके। साथ ही हम समुदाय के साथ काम कर के सामाजिक मान्यताओं को प्रभावित कर स्वच्छता की जरूरत पैदा करने की कोशिश भी करते हैं। स्वच्छ भारत मिशन को ले कर सरकार का गहरा राजनीतिक दृढ़संकल्प और इस पर दिया जा रहा ध्यान एक ऐतिहासिक मौका उपलब्ध करवा रहा है; हम शहरी और ग्रामीण दोनों ही मंत्रालयों के साथ गहन साझेदारी कर रहे हैं ताकि इस प्रयास को और तेज किया जा सके।