चुनौती

भारतीय कृषि हाल के दशकों में काफी आगे बढ़ी है, लेकिन उत्पादकता अब भी चुनौती बनी हुई है। देश की लगभग आधी आबादी अपनी जीविका के लिए कृषि पर निर्भर है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में गरीबी और कुपोषण का स्तर बहुत ऊंचा बना हुआ है। साथ ही पानी की कमी, जलवायु परिवर्तन और छोटी जोत जैसी समस्याओं की वजह से लाखों छोटे किसानों के लिए अपनी मेहनत का मुनाफा हासिल करना तो दूर अपने परिवार का पेट पालना भी मुश्किल हो जाता है।


अवसर

बेहतर उत्पादन, कृषि प्रबंधन साधन और तकनीक, पशु देख-भाल की बेहतर व्यवस्था, बीजों की बेहतर किस्म, बाजार से जुड़ाव और वित्तीय सेवाओं (कर्ज, बचत, भुगतान और बीमा) आदि तक पहुंच को बेहतर बना कर भारत के छोटी जोत वाले किसानों के भविष्य को काफी बेहतर किया जा सकता है।


हमारी रणनीति

हम भारत की महत्वपूर्ण फसलों (चावल, गेहूं और ज्वार जैसे अनाज) और पशुपालन (दुधारू पशु, छोटे पालतू पशु और मुर्गीपालन आदि) पर शोध करने में निवेश करते हैं और हम छोटी जोत वाले किसानों को जानकारी, साधन और बाजार तक पहुंच बढ़ाने वाले कार्यक्रमों को मजबूत करने में मदद करते हैं।

महिला किसानों से जुड़े मुद्दे फाउंडेशन की प्राथमिकता में हैं, क्योंकि भारतीय कृषि में महिलाएं बेहद अहम भूमिका निभाती हैं। हम खाद्य व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और कृषि व पोषण की कड़ी पर भी काम करते हैं।

कुछ उदाहरण

परिस्थिति सक्षम चावल

भारत और पूरे दक्षिण एशिया में ग्रामीण इलाकों में अक्सर सिंचाई के लिए जमीन के नीचे के पानी की कमी की वजह से गरीबी देखी जा सकती है। वर्षा सिंचित चावल ऐसी जगहों पर अकेली फसल हो जाती है, लेकिन चावल की उपज भी बाढ़, भूमि की लवणता और सूखे से बहुत प्रभावित होती है।

हम अफ्रिका और दक्षिण एशिया हेतु परिस्थिति सक्षम चावल (स्ट्रासा) नाम की शोध परियोजना में निवेश करते हैं, जो चावल की ऐसी किस्म विकसित करती है जो पर्यावरण की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।

स्ट्रासा ने अब तक भारत में चावल की ज्यादा उपज वाली नौ परिस्थिति सक्षम किस्में विकसित की हैं, जो दक्षिण एशिया में 2013 तक 11 मिलियन किसानों तक पहुंच गई है। हम भारत के कृषि मंत्रालय और पूर्वी भारत के सभी राज्यों को मदद करते हैं कि वे चावल की इन किस्मों के बारे में जानकारी उपलब्ध करवा सकें।


महिला सशक्तिकरण

महिला किसानों की संसाधनों और अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करने और खेती से ले कर घर-परिवार तक के कामों में फैसले लेने में ज्यादा सक्षम बनाने के लिए हमने भारत सरकार के साथ मिल कर महिला सशक्तिकरण और अधिकारों के लिए साझेदारी परियोजना शुरू की है। यह परियोजना सात राज्यों में 3,50,000 महिला किसानों के लिए काम करती है।

भारत की गरीब महिला किसानों के लिए काम की शुरुआत करने वाले संगठन प्रोफेशनल असिस्टेंस फॉर डेवलपमेंट एक्शन (प्रदान) से सहायता प्राप्त स्वयं-सहायता समूहों के जरिए महिला किसान अब कर्ज, उन्नत बीज, खाद, बाजार तक पहुंच और सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी हासिल कर रही हैं। हम ‘प्रदान’ के जरिए एक मिलियन से ज्यादा किसानों को सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाने में मदद करते हैं, जिसमें महिलाओं की उनके परिवार के पोषण, स्वास्थ्य और सामान्य देख-भाल में मदद भी शामिल है।


कृषि ज्ञान की साझेदारी

हम डिजिटल ग्रीन नाम के संगठन का सहयोग करते हैं जो तकनीकी और सामाजिक संगठनों की मदद से कृषि, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार के लिए काम करता है। डिजिटल ग्रीन के सूचना साझा करने के नए और किफायती तरीके भारत के सात राज्यों में राष्ट्रीय कृषि संबंधी सेवाओं को मजबूत कर रहे हैं और कृषि उत्पादकता को बढ़ा रहे हैं।

डिजिटल ग्रीन समुदाय के लोगों की ओर से ही तैयार किए गए वीडियो का उपयोग कर छोटी जोत वाले किसानों को नई और विकसित उत्पादन तकनीक, बाजार तक पहुंच और सरकारी कार्यक्रमों के बारे में सूचित करता है। यह 10,000 गांवों में एक मिलियन किसानों से जुड़ने के लिए भारत के राष्ट्रीय ग्रामीण जीविका मिशन, निजी क्षेत्र और शोध संस्थानों के साथ साझेदारी में काम करता है।